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ज़िंदगी को खिलखिलाना आ गया

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प्यार हमको अब निभाना आ गया
धीरे धीरे मुस्कुराना आ गया
….
चूम कर आँचल हवाओं ने कहा
आज मौसम आशिकाना आ गया
….
खुश रहो साजन जहाँ में तुम सदा
ज़िंदगी को खिलखिलाना आ गया
….
क्या कहें तुमसे न जाना छोड़ कर
हाल दिल का अब सुनाना आ गया
….
कर रही है यह हवायें अब वफ़ा
साथ जीने का ज़माना आ गया
रेखा जोशी

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
May 16, 2016

रेखा जी ! खुशियां मुबारक .शलीका सीखे कोई आपसे .सहज ,सरस अभिव्यक्ति .वाह ………

Bhola nath Pal के द्वारा
May 16, 2016

रेखा जी ! खुशियां मुबारक .शालिका सीखे कोई आपसे .सहज ,सरस अभिव्यक्ति .वाह ………

Rajeev Varshney के द्वारा
May 12, 2016

सुन्दर ग़ज़ल , बधाई बहन रेखा जी. सादर राजीव

Jitendra Mathur के द्वारा
May 10, 2016

बहुत खूब रेखा जी ! बहुत ही सुंदर ग़ज़ल है यह आपकी ।


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