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झूला झूले सखियाँ पिया तोहे पुकारूँ [गीत]

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झूला झूले सखियाँ पिया तोहे पुकारूँ
उड़ उड़ जाये चुनरी राह तेरी निहारूँ
……
है तीज का त्यौहार बाबुल तोरे अँगना
मेहँदी रचे हाथ नाम के तोरे सजना
खन खन चूड़ी खनके माथे बिंदिया सजाऊँ
झूला झूले सखियाँ पिया तोहे पुकारूँ
उड़ उड़ जाये चुनरी राह तेरी निहारूँ
……
न लागे मोरा जिया तेरे बिन ओ सैयाँ
पकड़ो मोरी बैयाँ लूँगी सजन बलैयाँ
छन छन पायल बाजे रूठा बलम मनाऊँ
झूला झूले सखियाँ पिया तोहे पुकारूँ
उड़ उड़ जाये चुनरी राह तेरी निहारूँ
……
रिम झिम बरसे पानी ठंडी पड़े फुहारें
धड़के मोरा जियरा साजन तुम्हे पुकारे
संग चलूँ मै तेरे सातों वचन निभाऊँ
झूला झूले सखियाँ पिया तोहे पुकारूँ
उड़ उड़ जाये चुनरी राह तेरी निहारूँ

रेखा जोशी

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rekhafbd के द्वारा
February 3, 2016

जितेंद्र जी ,आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का तहे दिल से शुक्रिया

Jitendra Mathur के द्वारा
February 3, 2016

अपनी माटी, अपने संस्कारों, अपने प्रेम-पगे सम्बन्धों से जुड़े तीज-त्योहारों और निर्मल हृदय में कहीं सुगबुगातीं कोमल भावनाओं की याद दिला दी आपके गीत ने । बहुत सुंदर गीत । सचमुच बहुत ही सुंदर ।


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