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भोले नयन कोतूहल भरे

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हँसते आँसू
भोले नयन कोतूहल भरे
घूर रहे
बचपन मेरा
धुले कपड़े मेरे
..
जानता हूँ मै
पगडंडियों के रास्ते
उड़ती धूल से
बिखरते बाल मटमैले कपड़े
भागते बच्चे धूल उड़ाते

छुप गया वह चेहरा
अजनबी सा दूर कहीं
खो गया अपरिचित सा
मेरी पलकों में
तैर रहे
भोले नयन कोतूहल भरे
घूर रहे
बचपन मेरा
धुले कपड़े मेरे

यादों में मेरी
चिपका रहा चेहरा
वही
भोले नयन कोतूहल भरे
घूर रहे
बचपन मेरा
धुले कपड़े मेरे
.
रेखा जोशी

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

तेज पाल सिंह के द्वारा
April 2, 2015

यादों में मेरी, चिपका रहा चेहरा वही, भोले नयन कोतूहल भरे, घूर रहे बचपन मेरा। रेखा जी, बहुत सुंदर कविता। आभार।

    rekhafbd के द्वारा
    April 3, 2015

    आपका हार्दिक आभार आदरणीय तेज पाल जी ,धन्यवाद


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