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मेरी यह तड़प है तुम्हारी ज़िंदगी

Posted On: 18 Apr, 2014 Others,social issues,कविता में

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मेरी यह तड़प है तुम्हारी ज़िंदगी
मत खेलो तुम
मेरे जज़्बातों से
नही समझ सकते
इस दिल की
पीड़ा तुम
तो
क्यों कुरेद रहे हो
सुलगते अरमानो को
सिसकती आहों से
हो गई
धुआँ धुआँ
ज़िंदगी मेरी
कैसे आती
मुस्कुराहट
होंठों पर तुम्हारे
समझ गई
शायद
मेरी यह तड़प
है तुम्हारी
ज़िंदगी

रेखा जोशी



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