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हे राम आओ संहार रावण का करने

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लगातार बढ़ रहे रेप,गैंग रेप के मामलों से हम सबका मस्तक शर्म के मारे झुक गया है ,,बेहद शर्मसार

सदियों पहले रावण को मारा राम ने
वह तो जिंदा हो रहा बार बार मर के
कभी निर्भया पकड़ता कभी गुड़िया
रावण ने डाले है जगह जगह पर डेरे
रूप अनेक बदल शोषण रहा है कर
फेंकता तेज़ाब कभी इज्ज़त रहा हर
चीख रही सीता आंसू नैनो में भर के
हे राम आओ संहार रावण का करने



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seemakanwal के द्वारा
May 2, 2013

सुन्दर रचना . आभार .

    rekhafbd के द्वारा
    May 2, 2013

    हार्दिक धन्यवाद सीमा जी ,आभार

shashi bhushan के द्वारा
April 30, 2013

आदरणीय रेखा जी, सादर ! यह सिर्फ आपका नहीं, बल्कि इस देश की जनता के हार्दिक उदगार हैं ! लगता है इनके पाप का घडा अभी पूरी तरह भरा नहीं है, थोड़ा सा खाली है ! परिवर्तन की उत्कट ईच्छा व्यक्त करती रचना !

    rekhafbd के द्वारा
    May 2, 2013

    शशि जी ,लगता है इनके पाप का घडा अभी पूरी तरह भरा नहीं है, थोड़ा सा खाली है ! परिवर्तन की उत्कट ईच्छा व्यक्त करती रचना ,सार्थक कमेन्ट आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 26, 2013

आदरणीया रेखा जी सादर अभिवादन अब राम जी ही करेंगे बेडा पार सादर बधाई

    rekhafbd के द्वारा
    April 26, 2013

    आदरणीय प्रदीप जी ,इस देश का तो राम ही रखवाला है ,आभार


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